चल आगे बढ़ – प्रयास गुप्ता

चल आगे बढ़
मत रूक मत थम,
इन चमक-धमक मे मत पड,
भौतिक सुविधाओ के संग,
मत थक तू चलता-चल
चल आगे बढ़।

कभी काँटें होंगे, कभी पतझड़,
कभी कलियाँ होंगी, कभी कोपल,
इन बिंब विधानो मे मत पड,
तू देख लक्ष्य तू आगे बढ़,
तू बेसुध हो, काँटो पर चल,
चल आगे बढ़।

किन बाधाओं से हार रहा,
जो आयी नहीं अब तक?
किन अभिलाषाओं को मार रहा,
जो पायी नहीं अब तक !
मत मुड़कर देख अतीत को तू,
बस अपने पथ का माप देख,

सीमाओं से मुक्त हो,
तप-दीप्त हो अविराम चल,
चल आगे बढ़।

– प्रयास गुप्ता

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