Takleef Dard Broken Shayari / तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी

Takleef Dard Broken Shayari / तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी दोस्तों हम सब अपने अपने प्यार मोहब्बत में ऐसे खो जाते है की हमे कुछ समझ ही नहीं आता और नहीं हम कुछ समझना कहते है और उसी की वजहसे हमे बहुत बार तकलीफ से भी गुज़रते है पर हमे ऐसा लगता ही नहीं की हमने कही पर गलती की है लेकिन जब एक वक़्त ऐसा आता है की हमे अपनी गलती का पता भी चल जाता है तब हमको इस बात का एहसास होता है की अगर वक़्त रहते हमने खुद को समला होता तो आअज ये टाइम नहीं आता हमे किसी भी दर्द से नहीं गुज़ारना पड़ता और ये तब समझ अत है जब जिसको हम बहुत कहते है वो हहमे चोर कर चला जाता है और तब हमारा सारा भरम टूट जाता है उसके बाद हमे कोई ऐसा मौका नहीं मिलता है की हम अपना खोया वक़्त वापस पा सके लेकिन दोस्तों हम अपना खोया वक़्त वापस तो नहीं पा सकते है लेकिन हम अपनी गलती को सुधर कर अपनी गलती को भुला कर अपना आने वाला कल सही कर सकते है क्यू की जब हमे कोई अपना छोड़ कर चला जाता है तब हम बहुत टूट जाते है और यही बात बोलते है खुद से की आज के बाद किसी पर भरोसा नहीं करेंगे और किसी से प्यार नहीं करेंगे लेकिन हमारा दिल पता नहीं कब किस पर आ जाता है और मोहब्बत हो जाती हैं पता भी नहीं चलता हमे किसी से प्यार अगर होता है तो हमे देखना चाहिए इंसान भरोसे है भी की नहीं और ऐसे ही किसी से मोहब्बत के चक्क्र में ना पड़े और दोस्तों आज हम अपने दोस्तों के लिए ये Takleef Dard Broken Shayari लेकर आये है Taqdeer Likhne Wali Shayari 

Takleef Dard Broken Shayari / तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी

Takleef Dard Broken Shayari

लगे हैं इलज़ाम दिल पे जो मुझको रुलाते हैं,
किसी की बेरुखी और किसी और को सताते हैं,
दिल तोड़ के मेरा वो बड़ी आसानी से कह गए अलविदा,
लेकिन हालात मुझे बेवफा ठहराते है।

काश कोई हम पर भी इतना प्यार जताती |
पीछे से आकर वो हमारी आँखों को छुपाती,
हम पूछते की कौन हो तुम…?
और वो हँसकर खुदको हमारी जान बताती..

मिटा दो नाम तक मेरा किताब-ए-ज़िन्दगी से तुम,
मगर पल-पल रुलाएगी… सताएगी कमी मेरी

जख़्म इतना गहरा हैं इज़हार क्या करें।
हम ख़ुद निशां बन गये ओरो का क्या करें।
मर गए हम मगर खुली रही आँखे।
क्योंकि हमारी आँखों को उनका इंतेज़ार हैं।

कितना अजीब अपनी ज़िंदगी का सफर निकला.
सारे जहाँ का दर्द अपना मुक़द्दर निकला
जिसके नाम अपनी ज़िंदगी का हर लम्हा कर दिया
अफसोस वही हमारी चाहत से बेखबर निकला

उसको क्या सज़ा दूं,
जिसने मोहब्बत में हमारा दिल तोड़ दिया,
गुनाह तो हमने किया,
जो उसकी बातो को मोहब्बत का रंग दे दिया।

दिल मे आरज़ू के दिये जलते रहेगे।
आँखों से मोती निकलते रहेगे।
तुम शमा बन कर दिल में रोशनी करो।
हम मोम की तरह पिघलते रहेंगे।

खाली शीशे भी निशान रखते हैं,
टूटे हुए दिल भी अरमान रखते हैं,
जो ख़ामोशी से गुज़र जाये,
वह दरिया भी दिल में तूफ़ान रखते हैं

ज़िंदगी से क्यूँ रूठ गए हो तुम,
इतने मायूस क्यूँ हो गए हो तुम,
जरूर तुम्हारा किसी ने दिल तोड़ा है,
जो इतने बेपरवाह हो गए हो तुम

किसी का कत्ल करने पर सजा-ए-मौत है लेकिन,
सजा क्या हो अगर दिल कोई किसी का तोड़ दे

तुझसे बहुत कहा था कि मुझे अपना न बना,
अब दिल मेरा तोड़ कर मेरा तमाशा न बना।

Takleef Dard Broken Shayari / तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी

tumhara kya bigda

तुम्हारा क्या बिगाड़ा था जो तुमने तोड़ डाला है,
ये टुकड़े मैं नहीं लूँगा मुझे तुम दिल बना कर दो।

दिल मेरा तोड़ा ऐसे वीरान भी न रहने दिया,
खुद खुदा हो गया मुझे इन्सान भी न रहने दिया।

अब न कोई हमें मोहब्बत का यकीन दिलाये,
हमें रूह में भी बसा कर निकाला है किसी ने

जब लिख ही दिया है तूने मेरा नाम रेत पर,
मिटने का फिर मेरे तू तमाशा भी देख ले

मुझे इन पत्थरों से खौफ न होता,
अगर शीशे का मेरा घर न होता,
यकीनन मैं भी खेलता इश्क़ की बाज़ी,
अगर दिल टूटने का डर न होता।

चलो मान लिया,
मुझे मोहब्बत करनी नहीं आती,
लेकिन ज़रा ये तो बताओ,
तुम्हे दिल तोड़ना किसने सिखाया

एक तुम मिल जाते बस इतना काफ़ी था,
सारी दुनिया के तलबगार नहीं थे हम।

देती है सुकून रूह को काँटों की चुभन भी,
खुशबू से कभी होती है सीने में जलन भी

एक ताल्लुक था सो आया हूँ खुदाया वरना,
कौन आता है तेरी महफ़िल में तमाशा बनने

फिर नहीं बसते वो दिल जो एक बार टूट जाते हैं,
कब्र कितनी ही संवारो कोई ज़िंदा नहीं होता

Takleef Dard Broken Shayari / तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी

zarasa bat karna

जरा सा बात करने का तरीका सीख लो तुम भी,
उधर तुम बात करते हो इधर दिल टूट जाता है

दिल जो टूटा तो कई हाथ दुआ को उठे,
ऐसे माहौल में अब किसको पराया समझें

मैं तो आईना हूँ टूटना मेरी फितरत है,
इसलिए पत्थरों से मुझे कोई गिला नहीं

बिछड़ के तुझसे न देखा गया किसी का मिलन,
उड़ा दिए हैं परिंदे भी हमने शजर पे बैठे हुए

दिल तोड़ कर हमारा तुमको राहत भी न मिलेगी,
हमारे जैसी तुमको कहीं चाहत भी न मिलेगी,
यूँ इतनी बेरुखी न दिखलाइये हमें,
हम अगर रूठे तो हमारी आहट भी न मिलेगी

वफ़ा की हमने और तुमने जफा की,
तुम अच्छे हम बुरे कुदरत खुदा की

काश उससे चाहने का अरमान ना होता,
मैं होश में रहते हुए अनजान न होता,
ना प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना पत्थर

दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ तो हुई,
लेकिन तमाम उम्र का आराम हो गया

दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ तो हुई,
लेकिन तमाम उम्र का आराम हो गया

कोई एहसान करदे मुझपे इतना सा बता कर,
भुलाया कैसे जाता है दिल तोड़ने वाले को

कुछ मोहब्बत का नशा था पहले हमको,
दिल जो टूटा तो नशे से मोहब्बत हो गई

वो शख्स फिर से मुझे तोड़ गया आज,
जिसे कभी हम पूरी दुनिया कहा करते थे

कोई इल्ज़ाम रह गया है तो वो भी दे दो,
पहले भी बुरे थे हम अब थोड़े और सही

अंदर कोई झाँके तो टुकड़ों में मिलूंगा,
ये हँसता हुआ चेहरा तो दिखाने के लिए है

मेरे गुनाह साबित करने की ज़हमत ना उठा,
बस खबर कर दे क्या क्या कबूल करना है

होंठों की हँसी को न समझ हकीक़त-ए-जिंदगी,
दिल में उतर के देख कितने टूटे हुए हैं हम

आखिरी बार सलाम-ए-दिल-ए-मुज़्तर ले लो,
फिर न लौटेंगे शब-ए-हिज्र के रोने वाले

बदल गए सब लोग आहिस्ता-आहिस्ता,
अब तो अपना भी हक़ बनता है।

भूल पाना मुझे इतना आसान तो नहीं है,
बातों-बातों में ही बातों से निकल आऊंगा

जाने लागे जब वो छोड़ के दामन मेरा,
टूटे हुए दिल ने एक हिमाक़त कर दी,
सोचा था कि छुपा लेंगे ग़म अपना,
मगर कमबख्त आँखों ने बगावत कर दी

तकलीफ दर्द ब्रोकन शायरी

hosh ud jaynge

होश उड़ जाएंगें मेरे कातिल के,
कोई उसे बता दे कि मैं जिंदा हू अभी।

फिर से कर दे कोई सजा मुकर्रर,
या इन्तेहां कर दे इस कशमकश की

मुमकिन हुआ तो मैं तुम्हें माफ़ करूँगा,
फिलहाल तेरे आँसुओं का मुन्तजिर हूँ मैं।

हारा हुआ सा लगता है वजूद मेरा,
हर एक ने लूटा है दिल का वास्ता देकर।

इश्क़ में मेरा इस कदर टूटना तो लाजमी था,
काँच का दिल था और मोहब्बत पत्थर से की थी।

जाने क्या मुझसे यह ज़माना चाहता है,
मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसना चाहता है,
जाने क्या बात झलकती है मेरे चेहरे से,
हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है।

मोहब्बत मुकद्दर है कोई ख़्वाब नही।
ये वो अदा है जिसमें हर कोई कामयाब नही।
जिन्हें मिलती मंज़िल उंगलियों पे वो खुश है।
मगर जो पागल हुए उनका कोई हिसाब नही

आखरी बार तेरे प्यार को सजदा कर लूँ
लौट के फिर तेरी महफ़िल में नही आऊंगा |
अपनी बर्बाद मोहब्बत का जनाज़ा लेकर,
तेरी दुनियां से बहुत दूर चला जाऊंगा.

तेरे वादों ने हमें घर से निकलने न दिया,
लोग मौसम का मज़ा ले गए बरसातों में,
अब न सूरज न सितारे न शम्मां न चांद,
अपने ज़ख्मों का उजाला है घनी रातों में

टूटा दिल तो गम कैसा,
वो चल दिये तो सितम कैसा,
मन भरा यार बदले,
बेवफा हुए साफ,
तो फिर इश्क का भ्रम कैसा

Badi Shiddat Se Toda Hai

Takleef Dard Broken Shayari

बड़ी शिद्दत से तोड़ा है मेरे दिल का हर कोना,
मुझे तो सच कहूँ उस के हुनर पे नाज़ होता है

कहकहों की आँच को तन्हाइयाँ सहती रहीं,
और आँखें आंसुओं से मशविरा करती रहीं,
एक रियाजे-फन यही उनको सलामत रख सका,
कतरा-ए-खूं से ही जख्मे-दिल को भरती रहीं।

घायल करके मुझे उसने पूछा,
करोगे क्या फिर मोहब्बत मुझसे,
लहू-लहू था दिल मगर
होंठों ने कहा बेइंतहा-बेइंतहा।

वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी जो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए… मेरी तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए

काश उसे चाहने का अरमान ना होता,
मैं होश में रहते हुए अनजान ना होता,
ना प्यार होता किसी पत्थर दिल से हमको,
या फिर कोई पत्थर दिल इंसान ना होता।

तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं,
एक जरा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं

ये हकीक़त है कि होता है असर बातों में,
तुम भी खुल जाओगे दो-चार मुलक़ातों में,
तुम से सदियों की वफाओं का कोई नाता न था,
तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों में

जख्म तो हम भी अपने दिल में
तुमसे गहरे रखते हैं,
मगर हम जख्मों पे
मुस्कुराहटों के पहरे रखते हैं

कांच का तोहफा न देना कभी किसी,
रूठ के लोग तोड़ दिया करते हैं,
जो बहुत अच्छे हों उनसे प्यार मत करना,
अच्छे लोग ही दिल तोड़ दिया करते हैं

ख्वाहिशें थीं चाँद तारे तोड़ लाने की मगर,
देख लो बिखरा पड़ा है वो जमीं पर टूट

Irado Me Abhi Itni Jaan Baki Hai

Takleef Dard Broken Shayari

इरादों में अभी भी क्यों इतनी जान बाकी है,
तेरे किये वादों का इम्तिहान अभी बाकी है,
अधूरी क्यों रह गयी तुम्हारी यह बेरुखी,
अभी दिल के हर टुकड़े में तेरा नाम बाकी है

दर्द को दर्द अब होने लगा है।
दर्द अपने गम पे खुद रोने लगा है।
अब हमें दर्द से दर्द नही लगेगा।
क्योंकि दर्द हमको छू कर खुद सोने लगा है

जिस्म से मेरे तड़पता दिल कोई तो खींच लो,
मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब है यकीं

दो शब्दों में सिमटी है मेरी मुहब्बत की दास्तान,
उसे टूट कर चाहा और चाह कर टूट गये

लुटा चुका हूँ बहुत कुछ,
अपनी जिंदगी में यारो,
मेरे वो जज्बात तो ना लूटो,
जो लिखकर बयाँ करता हूँ

मुझसे वास्ता नही रखना तो
फिर मुझपे नजर क्यूं रखता है?
मैं किस हाल में जिंदा हूँ
तू मेरी खबर क्यूं रखता है

ऐसा तल्ख़ जवाबे-वफ़ा पहली ही दफा मिला,
हम इस के बाद फिर कोई अरमां न कर सके

जब प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते,
खत किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते,
किस वास्ते लिखा है हथेली पे मेरा नाम,
मैं हर्फ़ गलत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते

दर्द बन कर दिल में छुपा कौन है,
रह रह कर इसमें चुभता कौन है,
एक तरफ दिल है और एक तरफ आइना,
देखते है इस बार पहले टूटता कौन है

चाहा ना उसने मुझे बस देखता रहा,
मेरी ज़िंदगी से वो इस तरह खेलता रहा,
ना उतरा कभी मेरी ज़िंदगी की झील में,
बस किनारे पर बैठा पथर फेंकता रहा

Pyar Kiya Badnam Ho Gaye

Takleef Dard Broken Shayari

प्यार किया बदनाम हो गए,
चर्चे हमारे सरे-आम हो गए,
ज़ालिम ने दिल उस वक़्त तोड़ा,
जब हम उसके गुलाम हो गए

मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बत,
लेते न कभी भूल के हम नाम-ए-मोहब्बत

अब कहाँ जरुरत है हाथों में पत्थर उठाने की​​,
​​तोड़ने वाले तो दिल जुबां से ही तोड़ दिया करते है।

टूटा तिलिस्म-ए-अहद-ए-मोहब्बत कुछ इस तरह,
फिर आरज़ू की शमा फ़ुरेज़ाँ न कर सके

बनके अजनबी मिले है ज़िंदगी के सफर में,
इन यादों को हम मिटायेंगे नहीं,
अगर याद करना फितरत है आपकी,
तो वादा है हम भी आपको भुलायेंगे नहीं

उजड़ी हुई दुनिया को तू आबाद न कर,
बीते हुए लम्हों को अब तू याद न कर,
एक क़ैद परिंदे ने ये कह दिया हम से,
मैं भूल चुका हूँ उड़ना मुझे आजाद न कर।

दुनिया ये मुहब्बत को मुहब्बत नहीं देती,
इनाम तो बड़ी चीज है कीमत नहीं देती,
देने को मैं भी दे सकता हूँ गाली उसे,
मगर मेरी तहजीब मुझे इजाजत नहीं देती

मेरे हाथों से मेरी तकदीर भी वो ले गया,
आज अपनी आखिरी तस्वीर भी वो ले गया

नहीं वादा कोई करना नहीं कसमें ही खानी है,
मुझे चुपचाप रहकर यूं सभी रस्में निभानी है।

ज़िन्दगी से अपना हर दर्द छुपा लेना,
ख़ुशी न मिले तो गम गले लगा लेना,
कोई अगर कहे मोहब्बत आसान होती है,
तो उसे मेरा टूटा हुआ दिल दिखा देना

Wo Baat Kya Kare Jiski Koi Khabar Na Ko

Takleef Dard Broken Shayari

वो बात क्या करें जिसकी कोई खबर ना हो।
वो दुआ क्या करें जिसका कोई असर ना हो।
कैसे कह दे कि लग जाय हमारी उमर आपको।
क्या पता अगले पल हमारी उमर ना हो।

खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,
हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ,
मिलते रहे दुनिया से जो ज़ख्म मेरे दिल को,
उनको भी समझकर मैं सौगात बरतता हूँ।

ये संग-दिलों की दुनिया है,
यहाँ सँभल के चलना दोस्त,
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है,
नज़रों से गिराने के लिए।

चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत हैं,
हम उसकी याद में परेशां बहुत हैं,
वह हर बार दिल तोड़ता है ये कह कर कि,
मेरी उम्मीदों की दुनिया में अभी मुकाम बहुत हैं।

तकदीर… बता तू ने मुझको,
किस मोड़ पर लाके छोड़ दिया,
एक मोड़ तलक तो साथ दिया,
एक मोड़ पर ला के छोड़ दिया,
खुद प्यार किया खुद ठुकराया,
फिर प्यार भरा दिल तोड़ दिया,
उस मोड़ तलक तो साथ दिया,
इस मोड़ पर ला के छोड़ दिया।

किसी टूटे हुए दिल की आवाज मुझे कहिये,
तार जिसके सब टूटे हों वो साज़ मुझे कहिये,
मैं कौन हूँ और किसके लिए जिंदा हूँ,
मैं खुद नहीं समझा वो राज मुझे कहिये

ऐ दिल मत कर इतनी मोहब्बत किसी से,
इश्क में मिला दर्द तू सह नहीं पायेगा,
टूट कर बिखर जायेगा अपनों के हाथों,
किसने तोड़ा ये भी किसी से कह न पायेगा

सामने मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना ।
जो मन मे हो वो ख़्वाब ना तोड़ना ।
हर कदम पर मिलेगी सफ़लता ।
बस आसमान छूने के लिए जमीन ना छोड़ना

कौन कहता है कि दिल
सिर्फ लफ्जों से तोड़ा जाता है?
तेरी ख़ामोशी भी कभी कभी
आँखें नम कर देती है।

चलो अब जाने भी दो क्या करोगे दास्ताँ सुनकर,
ख़ामोशी तुम समझोगे नहीं और बयाँ हमसे होगा नहीं

पिलाने वाले कुछ तो पिला दिया होता,
शराब कम थी तो पानी मिला दिया होता!

मत कर हंगामा पीकर हमारी गली में,
हम तो खुद बदनाम है तेरी मोहब्बत के नशे में!

जिसने हमको चाहा उसे हम चाह न सके,
और जिसको हमने चाहा उसको हम पा न सके

“बादाम खाने से उतनी अक्ल नहीं आती,
जितनी धोखा खाने से आती है

देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ,
हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए

फिर उसकी याद, फिर उसकी आस, फिर उसकी बातें,
ऐ दिल लगता है तुझे तड़पने का बहुत शौक है

Zakham Khareed Laya Hu

Takleef Dard Broken Shayari

ज़ख़्म खरीद लाया हूं बाज़ार-ए-इश्क़ से,
दिल ज़िद कर रहा था मुझे इश्क चाहिए

कोई अपना हमसे जब भी रूठ जाता है,
ऐसा लगता साथ रब छूट जाता है.

वक्त के बदल जाने से इतनी तकलीफ नही होती है,
जितनी किसी अपने के बदल जाने से तकलीफ होती है

गिरना था जो आपको तो सौ मक़ाम थे,
ये क्या किया कि निगाहों से गिरगए

चाहत इतनी थी की उनको बताई न गई,
चोट दिल पर लगी इसलिए दिखाई न गई,

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है,
उधर ही ले चलो कश्ती जहां तूफान आया है

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